भारत में अनिवार्य रोजगार व्यवस्था

 सुप्रीम कोर्ट में जनहित याचिका

🇮🇳 भारत में अनिवार्य रोजगार व्यवस्था

(Universal & Compulsory Employment System)

1️⃣ संपूर्ण भारत में काम करने का अनिवार्य नियम

विवरण

भारत सरकार संपूर्ण भारत में यह नियम लागू करेगी कि

 काम करने में सक्षम प्रत्येक व्यक्ति को काम करना अनिवार्य होगा

काम न करना (जब अवसर उपलब्ध हो) सामाजिक दायित्व का उल्लंघन माना जाएगा

संवैधानिक आधार

अनुच्छेद 41 – काम पाने का अधिकार

अनुच्छेद 21 – गरिमापूर्ण जीवन

अनुच्छेद 38 – सामाजिक न्याय

आवश्यकता

बेरोजगारी, अपराध और गरीबी समाप्त करने हेतु

भारत की तरक्की और विकास हेतु 

भारतीय समाज को अपराध मुक्त करने हेतु

2️⃣ संपूर्ण भारत में सरकार अनिवार्य रूप से रोजगार प्रदान करें। 

भारत में रहने वाला प्रत्येक व्यक्ति को सरकार रोजगार प्रदान करावेगी यह सरकार का कर्तव्य होगा। भारत का कोई भी व्यक्ति सरकार से रोजगार पानी की मांग कर सकता है और भारत सरकार का दायित्व है कि वह भारत की प्रत्येक व्यक्ति को उसकी योग्यता के अनुसार उचित रोजगार प्रदान करें।

विवरण

प्रत्येक व्यक्ति की:

शिक्षा

कौशल

शारीरिक क्षमता

रुचि

 के अनुसार रोजगार सुनिश्चित किया जाए

संवैधानिक आधार

अनुच्छेद 14 – समानता

अनुच्छेद 16 – रोजगार में समान अवसर

अनुच्छेद 41

3️⃣ प्रत्येक तहसील में रोजगार कार्यालय की स्थापना

विवरण

हर तहसील में तहसीलदार के नियंत्रण में “रोजगार कार्यालय”

इस कार्यालय में:

तहसील के हर नागरिक का पंजीकरण

कौन कहाँ काम करता है

मासिक आय

बेरोजगारों की सूची

संवैधानिक आधार

अनुच्छेद 243G – स्थानीय शासन

अनुच्छेद 40 – ग्राम/स्थानीय स्वशासन

4️⃣ तहसील रोजगार कार्यालय के प्रमुख कार्य

✔ बेरोजगारों की पहचान

 ✔ उन्हें उपयुक्त काम पर लगाना

 ✔ निजी व सरकारी कार्यस्थलों से समन्वय

 ✔ मजदूरी शोषण रोकना

 ✔ न्यूनतम मजदूरी की जानकारी देना

 ✔ मजदूरों को उनके अधिकारों की शिक्षा

संवैधानिक आधार

अनुच्छेद 39(d) – समान वेतन

अनुच्छेद 43 – गरिमामय जीवन

5️⃣ हर नागरिक को आजीविका हेतु कोई न कोई हुनर सिखाना

विवरण

भारत सरकार:

प्रत्येक बच्चे

प्रत्येक बेरोजगार नागरिक

 को कोई न कोई व्यावहारिक कौशल (Skill) सिखाएगी जिससे कि व्यक्ति अपने परिवार का भरण पोषण कर सके और अपने परिवार के साथ-साथ भारत की तरक्की में अपना योगदान दे सके।

संवैधानिक आधार

अनुच्छेद 41

अनुच्छेद 21A (शिक्षा + कौशल)

प्रभाव

स्वरोज़गार

आत्मनिर्भर परिवार

परिवार का प्रत्येक नागरिक काम करेगा परिवार के साथ-साथ भारत का विकास होगा 

भारतीय परंपरा और संस्कृति का संरक्षण होगा

6️⃣ बेरोजगारी भत्ता बंद, प्रत्यक्ष रोजगार लागू

विवरण

बेरोजगारी भत्ता समाप्त

इसके स्थान पर: सरकार सीधे रोजगार उपलब्ध कराएगी

संवैधानिक आधार

अनुच्छेद 41

अनुच्छेद 39(a) – आजीविका का अधिकार

लाभ

काम के बदले सम्मान

निष्क्रियता समाप्त

7️⃣ महंगाई के आधार पर न्यूनतम मजदूरी तय करना

विवरण

हर 6 महीने में:

महंगाई का आंकड़ा सार्वजनिक

उसी के अनुसार:

न्यूनतम मजदूरी बढ़े या घटे

संवैधानिक आधार

अनुच्छेद 43 – जीवन योग्य वेतन

अनुच्छेद 39(d)

8️⃣ कमजोर मजदूर वर्ग के संरक्षण की विशेष व्यवस्था

विवरण

कम पढ़े-लिखे, असंगठित मजदूरों के लिए:

कानूनी शिक्षा

न्यूनतम मजदूरी की जानकारी

शोषण से सुरक्षा

रोजगार में आरक्षण की व्यवस्था। भारत में जो आर्थिक रूप से कमजोर है उन लोगों को आरक्षण के माध्यम से ऊपर उठाना और जो परिवार आर्थिक रूप से संपन्न है उन पर आरक्षण व्यवस्था लागू न करना।

संवैधानिक आधार

अनुच्छेद 38 – सामाजिक न्याय

अनुच्छेद 46 – कमजोर वर्गों की सुरक्षा

9️⃣ श्रमिक सुरक्षा एवं राहत फंड की स्थापना

प्रस्तावित फंड का नाम

🟢 भारत श्रमिक सुरक्षा एवं राहत कोष

(Bharat Labour Security & Relief Fund – BLSRF)

🔟 इस फंड का उद्देश्य

✔ काम के दौरान चोट

 ✔ अस्पताल में भर्ती

 ✔ स्थायी विकलांगता

 ✔ श्रमिक की मृत्यु

➡ इन सभी स्थितियों में परिवार को आर्थिक सहायता ताकि परिवार का भरण पोषण हो सके

संवैधानिक आधार

अनुच्छेद 41

अनुच्छेद 43

अनुच्छेद 38

1️⃣1️⃣ फंड के स्रोत

भारत सरकार

सभी:

उद्योग

फैक्ट्री

दुकान

शोरूम

वाणिज्यिक इकाइयाँ

 ➡ अनिवार्य योगदान

संवैधानिक आधार

अनुच्छेद 266 – संचित निधि

अनुच्छेद 39(b)

1️⃣2️⃣ तहसील स्तर पर पंजीकरण अनिवार्य

विवरण

तहसील में रहने वाला हर कामगार:

रोजगार कार्यालय में पंजीकृत

बिना पंजीकरण:

रोजगार अवैध माना जाएगा

उद्देश्य

मजदूरों का शोषण रोकना

पारदर्शिता

1️⃣3️⃣ इस प्रणाली से होने वाले परिवर्तन

👨 व्यक्ति

सुनिश्चित रोजगार

स्थिर आय

सम्मानजनक जीवन

👨‍👩‍👧 समाज

अपराध में कमी

गरीबी समाप्ति

सामाजिक स्थिरता

🇮🇳 राष्ट्र

पूर्ण रोजगार राष्ट्र

मजबूत अर्थव्यवस्था

सामाजिक न्याय आधारित भा

रत

🔚 निष्कर्ष

👉 यह मॉडल भारत को

 “बेरोजगारी-मुक्त, शोषण-मुक्त और आत्मनिर्भर राष्ट्र”

 बनाने की दिशा में संविधानसम्मत क्रांतिकारी ढाँचा है।

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