🌿 भाग 2 — प्रकृति का वैज्ञानिक रहस्य, उसकी अदृश्य सत्ता और मानव द्वारा उसके विरुद्ध अपराध
1. प्रकृति की अदृश्य सत्ता — जो हर जीव को चलाती है
दुनिया में जितनी भी शक्तियाँ हैं—गुरुत्वाकर्षण, चुंबकत्व, ऊर्जा, ताप, हवाएँ, बादल, समुद्र की लहरें, ऋतु परिवर्तन—इन सबके पीछे कोई एक व्यक्ति, संस्था, राजा, राष्ट्र या धर्म नहीं है।इन सबके पीछे एक ही सत्ता है — प्रकृति।मनुष्य जो कुछ भी बनाता है वह सीमित होता है:उसका आकार सीमित,उसका प्रभाव सीमितउसका कार्य सीमित,उसका अस्तित्व सीमित,अनंत ऊर्जा,अनंत संसाधन,अनंत शक्ति,अनंत समय,अनंत सहनशीलताऔर अनंत दायित्व
🌱 प्रकृति स्वयं को चलाती है — यह किसी के आदेश की प्रतीक्षा नहीं करती।मनुष्य नियम बनाता है, और तोड़ देता है। प्रकृति नियम बनाती है, और खुद ही उनका पालन करती है।और जब कोई जीव उन नियमों को तोड़ने की कोशिश करता है, प्रकृति उसे सुधारती नहीं — दंडित करती है।
2. मनुष्य का अभिमान — “हम प्रकृति से बड़े हैं”मनुष्य का सबसे बड़ा भ्रम यही है कि:हम तकनीक से मजबूत हो गए,हम प्रकृति को नियंत्रित कर सकते हैं,हम मौसम को बदल सकते हैं,,हम नदियों को मोड़ सकते हैं,हम पहाड़ काट सकते हैं,हम जंगलों को मिटा सकते हैं,हाँ, मनुष्य यह सब कर सकता है — लेकिन परिणाम सहने की क्षमता उसके पास नहीं।तकनीक प्रकृति के खिलाफ एक हथियार नहीं, केवल एक खिलौना है।मनुष्य यह समझने में असफल हो गया कि प्रकृति के सामने उसकी सभी इमारतें, तकनीकें, मशीनें, विज्ञान, हथियार—सब तिनके की तरह हल्के हैं।एक तूफान, एक भूकंप, एक बाढ़, एक सूखा, एक महामारी—और मनुष्य की सारी शक्ति धूल हो जाती है।
3. प्रकृति के विरुद्ध मनुष्य के पाँच सबसे बड़े अपराध
3.1 जंगलों को काटना — जीवन की ऑक्सीजन खत्म करना,जंगल केवल पेड़ नहीं हैं, वे पृथ्वी के “फेफड़े” हैं। लेकिन मनुष्य उन्हें जलाता है, काटता है, उखाड़ता है और उसकी जगह कंक्रीट लगा देता है।
परिणाम:
ऑक्सीजन घटती है,CO₂ बढ़ता है,तापमान बढ़ता है,वर्षा का चक्र टूटता है
मिट्टी बंजर हो जाती है,लाखों जीव मर जाते हैं,जलवायु असंतुलन पैदा होता है,मनुष्य एक पेड़ को लकड़ी समझता है, जबकि प्रकृति उस पेड़ को प्राणवायु समझती है।
3.2 जलस्रोतों को प्रदूषित करना — जीवन के रक्त को विष देना
नदियाँ जीवन की धमनियाँ हैं।वे पानी नहीं लातीं, बल्कि जीवन लाती हैं।
मनुष्य ने नदियों के साथ क्या किया?फैक्ट्रियों का कचरा फेंका,रसायन उड़ेला,प्लास्टिक बहाया,सीवेज छोड़ा,जमीन का पानी खाली किया,नदी के प्राकृतिक प्रवाह में बाधा डाली,आज दुनिया की 70% से अधिक नदियाँ प्रदूषित हो चुकी हैं।यह केवल पर्यावरण समस्या नहीं — भविष्य में युद्ध का कारण बनेगी।
3.3 वायु का विषाक्त होना — सांस को जहर बनाना
वायु पहले एक उपचार थी, अब एक बीमारी बन गई है।कारण:वाहन,कारखाने,धूल,रसायन,धुआँ,खरपतवार नाशक,प्लास्टिक कचरा,हवा में आज ऑक्सीजन से अधिक विषैले कण हैं।बच्चे सांस लेते नहीं — प्रदूषण पीते हैं।
3.4 मिट्टी का मरना — भोजन का मरना
मिट्टी केवल धूल नहीं —मिट्टी भोजन का गर्भ है।सदियों से मिट्टी जीवित थी, उपजाऊ थी।लेकिन आज:रासायनिक खाद,कीटनाशक,भारी उद्योग,कचरा,प्लास्टिक,खनन
इन सबने मिट्टी को मरा हुआ शरीर बना दिया है।जहाँ मिट्टी मरती है —वहाँ आज भूख, कल विनाश, फिर जनसंख्या संकट जन्म लेता है।
3.5 जलवायु परिवर्तन — पृथ्वी का ताप मनुष्य के खिलाफ
प्रकृति के तापमान में केवल 1-2°C की वृद्धि पृथ्वी पर बड़े-बड़े परिवर्तनों का कारण बनती है:ग्लेशियर पिघलते हैं,समुद्र स्तर बढ़ता है,तटवर्ती शहर डूबते हैं,वर्षा असंतुलित होती है,तूफान बढ़ते हैं,जंगल जलते हैं,खेती नष्ट होती है,,पशु-पक्षी मरते हैं,यह सब मनुष्य के उस अपराध का दंड है, जिसे विकास कहा जाता है।
4. प्रकृति का संतुलन कैसे बिगड़ा और अब कैसे टूट रहा है
प्रकृति करोड़ों वर्षों से संतुलित थी।वह जानती थी कब:वर्षा करनी है,गर्मी बढ़ानी है,ठंड लानी है,हवा बहानी है,फल-फूल उगाने हैं,नदी बहानी है,समुद्र शांत रखना है,लेकिन मनुष्य ने इस संतुलन में हस्तक्षेप किया:जल चक्र, तोड़ा,वायु चक्र प्रदूषित किया,कार्बन चक्र बढ़ाया,तापमान बढ़ाया,नदियों पर बाँध लगाए,पर्वत काटे,समुद्र भरने की कोशिश की,जमीन को कंक्रीट से सील किया,अब प्रकृति का अपना धैर्य टूट रहा है।,जब प्रकृति का धैर्य टूटता है, तब विनाश शुरू होता है।
5. मनुष्य के लिए भयानक परिणाम — जो आने ही वाले हैं
🚨 5.1 पानी खत्म होना
पानी पृथ्वी पर है, पर पीने योग्य पानी बहुत कम।आज नदियाँ, तालाब, झीलें सूख रही हैं।भविष्य में:शहर पानी के लिए लड़ेंगे,देश एक-दूसरे पर आक्रमण करेंगे,पानी सोने से महँगा होगा
🚨 5.2 भोजन संकट
मिट्टी मर रही है।कीट बढ़ रहे हैं।अत्यधिक गर्मी से फसलें झुलस रही हैं।
भविष्य में:अनाज महँगा होगा,भूख बढ़ेगी,कुपोषण होगा
🚨 5.3 प्राकृतिक आपदाएँ बढ़ेंगी
बाढ़,सूखा,भूकंप,चक्रवात,जंगल की आग
ये भविष्य नहीं — आज की सच्चाई बन चुके हैं।
🚨 5.4 मानव स्वास्थ्य नष्ट होगा
फेफड़ों की बीमारियाँ,कैंसर,नई महामारियाँ,मानसिक रोग,हार्मोनल असंतुलन,ये सब प्रकृति के साथ खिलवाड़ का परिणाम हैं।
6. मनुष्य को क्या करना चाहिए — समाधान का मार्ग
प्रकृति को धर्म की तरह मानना,पेड़ लगाना,जल बचाना,प्लास्टिक छोड़ना,ऊर्जा का संयमित उपयोग,प्राकृतिक जीवनशैली अपनाना,कचरा विभाजन और रिसाइक्लिंग,पशु-पक्षियों की रक्षा,मिट्टी को जीवित करना,बच्चों को प्रकृति का महत्व सिखाना
🌿 प्रकृति को बचाना कोई विकल्प नहीं — यह मानवता का भविष्य है।
“यह अंश हमारी पुस्तक सर्व साम्य अद्वैत प्रकृति चेतनवाद दर्शन — भाग 1 : नव सवित तत्व प्रकृतिवाद से लिया गया है। इस पुस्तक का उद्देश्य प्रकृति की सर्वोच्च सत्ता की स्थापना करके विश्व में शांति स्थापित करना है, ताकि धरती पर रहने वाले सभी जीवों के जीवन में शांति बनी रहे, मनुष्य के जीवन में भी संतुलन और सौहार्द रहे, तथा सभी मनुष्य आपस में मिल-जुलकर अपने विकास का मार्ग प्रशस्त कर सकें। हमारी प्रकृति से प्रार्थना है कि धरती पर स्थित प्रत्येक जीव सुखी रहे, स्वस्थ रहे।” आप भी चाहते हैं विश्व में शांति तो हमसे संपर्क करें।
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