🌿 भाग 3 — पृथ्वी के प्राकृतिक चक्र, जैव-विविधता और मानव द्वारा किया जा रहा विनाश
1. प्राकृतिक चक्र: पृथ्वी के जीवन-दायक तंत्र
पृथ्वी पर जीवन केवल इसलिए संभव है क्योंकि प्राकृतिक तंत्र संतुलित हैं।
ये तंत्र बिना किसी मानव हस्तक्षेप के स्वयं काम करते हैं।
प्राकृतिक चक्र जीवन का आधार हैं और इनकी चार प्रमुख प्रणाली हैं:
जल चक्र (Hydrological Cycle)
कार्बन चक्र (Carbon Cycle)
नाइट्रोजन चक्र (Nitrogen Cycle)
ऑक्सीजन चक्र (Oxygen Cycle)
1.1 जल चक्र
समुद्रों, नदियों, झीलों से पानी वाष्पित होता है
बादलों के रूप में संघनित होता है
वर्षा के रूप में पृथ्वी पर लौटता है
मिट्टी में अवशोषित होकर फसल और पेड़-पौधों को जीवन देता है
मनुष्य के कारण संकट:
नदियों में बांध
जल प्रदूषण
जंगलों की कटाई
भूमिगत जल का अत्यधिक दोहन
1.2 कार्बन चक्र
पौधे CO₂ को अवशोषित कर ऑक्सीजन छोड़ते हैं
जीव-जंतु CO₂ उत्सर्जित करते हैं
वायुमंडलीय CO₂ संतुलित रहता है
मनुष्य के कारण संकट:
कोयला, पेट्रोलियम, गैस जलाना → CO₂ बढ़ना
जंगल काटना → अवशोषण घटना
ग्लोबल वार्मिंग बढ़ना
1.3 नाइट्रोजन चक्र
मिट्टी में नाइट्रोजन पौधों द्वारा अवशोषित होता है
खाद्य श्रृंखला के माध्यम से वापस वायुमंडल में लौटता है
मनुष्य के कारण संकट:
रासायनिक उर्वरक → मिट्टी और जल प्रदूषित
नाइट्रोजन असंतुलन → फसलों की गुणवत्ता घटती है
1.4 ऑक्सीजन चक्र
महासागर और जंगल जीवन के लिए ऑक्सीजन पैदा करते हैं
ऑक्सीजन न होने पर जीवित प्राणी दम तोड़ देते हैं
मनुष्य के कारण संकट:
जंगल कटते हैं → ऑक्सीजन कम
जल प्रदूषित → समुद्री वनस्पति कम
वायु प्रदूषण → सांस लेना कठिन
2. जंगल: पृथ्वी के फेफड़े और जीवनदाता
2.1 जंगल का महत्व
ऑक्सीजन उत्पादन
कार्बन अवशोषण
जलवायु संतुलन
भूमि कटाव रोकना
जानवरों का आवास
2.2 जंगल विनाश के परिणाम
भूजल स्तर गिरना
वर्षा असंतुलित होना
तापमान बढ़ना
जानवरों का अस्तित्व संकट में
प्राकृतिक आपदाएँ बढ़ना
2.3 उदाहरण
अमेज़ॅन जंगल की कटाई → CO₂ बढ़ा
भारत के वनों की कटाई → सूखा और बाढ़
3. महासागर और जल जीवन
3.1 महासागर का महत्व
पृथ्वी का तापमान नियंत्रित करता है
जीवन के लिए आवश्यक पोषक तत्व प्रदान करता है
जैव-विविधता का विशाल आधार है
3.2 महासागर विनाश
प्लास्टिक प्रदूषण
तेल रिसाव
औद्योगिक कचरा
असंतुलित मछली पकड़ना
परिणाम:
समुद्री जीवन संकट में
मछली, शंख, समुद्री पौधे मर रहे हैं
समुद्री तट अस्थिर हो रहे हैं
4. पर्वत और भूमि का महत्व
4.1 पर्वत और जीवन
नदियों का स्रोत
वर्षा का नियंत्रक
जल संग्रह
जैव विविधता का आधार
4.2 पर्वत विनाश
खनन
वनों की कटाई
अवैध निर्माण
परिणाम:
बाढ़ बढ़ती है
मिट्टी कटाव
जानवरों का आवास नष्ट
5. जैव-विविधता: पृथ्वी का जीवन तंत्र
5.1 जैव-विविधता का महत्व
भोजन श्रृंखला संतुलित रखना
प्राकृतिक प्रतिरोधक क्षमता
वनों और समुद्र का स्वास्थ्य
5.2 मनुष्य द्वारा विनाश
अतिकटाई
जंगल कटाई
जल प्रदूषण
प्लास्टिक फैलाना
रासायनिक खाद/कीटनाशक
परिणाम:
प्रजातियाँ विलुप्त हो रही हैं
खाद्य श्रृंखला टूट रही है
प्राकृतिक संतुलन बिगड़ रहा है
6. मानव इतिहास और प्रकृति का इतिहास
मानव ने प्रकृति से जुड़कर सभ्यता बनाई
खेती, जल प्रबंधन, प्राकृतिक संसाधन का संतुलन
औद्योगिकीकरण और लालच ने प्रकृति को चुनौती दी
आधुनिक मानव प्राकृतिक संतुलन को नष्ट कर रहा है
7. मानव अपराध और चेतावनी
जंगल कटाना
नदियों का प्रदूषण
वायु प्रदूषण
मिट्टी का मरना
प्लास्टिक और कचरा
अत्यधिक CO₂ उत्सर्जन
जलवायु परिवर्तन
जैव-विविधता का विनाश
प्राकृतिक संसाधनों का अति दोहन
प्राकृतिक आपदाओं का कारण बनना
8. समाधान और समर्पण का मार्ग
प्रकृति को धर्म और ईश्वर मानना
जल और वायु का संरक्षण
प्राकृतिक जीवनशैली अपनाना
पेड़ लगाना और जंगल बचाना
जैव-विविधता की रक्षा
बच्चों को प्रकृति का महत्व सिखाना
प्लास्टिक और प्रदूषण कम करना
सौर ऊर्जा अपनाना
कचरा प्रबंधन
प्राकृतिक चक्र के अनुसार जीवन
जीना
निष्कर्ष: प्रकृति को बचाना = मानव जीवन को बचाना।
मनुष्य जब तक प्रकृति को सम्मान नहीं देगा, तब तक भविष्य असुरक्षित रहेगा।
“यह अंश हमारी पुस्तक सर्व साम्य अद्वैत प्रकृति चेतनवाद दर्शन — भाग 1 : नव सवित तत्व प्रकृतिवाद से लिया गया है। इस पुस्तक का उद्देश्य प्रकृति की सर्वोच्च सत्ता की स्थापना करके विश्व में शांति स्थापित करना है, ताकि धरती पर रहने वाले सभी जीवों के जीवन में शांति बनी रहे, मनुष्य के जीवन में भी संतुलन और सौहार्द रहे, तथा सभी मनुष्य आपस में मिल-जुलकर अपने विकास का मार्ग प्रशस्त कर सकें। हमारी प्रकृति से प्रार्थना है कि धरती पर स्थित प्रत्येक जीव सुखी रहे, स्वस्थ रहे।” आप भी चाहते हैं विश्व में शांति तो हमसे संपर्क करें।
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